पति-पत्नी तभी कहलाने का हक है, जब उनमें परस्पर प्रेम हो।
मुझे लगता है किसी भी रिश्ते में और खासकर पति और पत्नी के रिश्ते में सबसे पहली और जरूरी चीज है दोस्ती, क्योंकि दोस्ती के साथ रिश्ते की समझ बनती और बढ़ती है’।यहाँ सभी पति-पत्नी बस नाम के ही पति-पत्नी है, कि समाज ने, माँ – बाप ने विवाह के सूत्र में बाँध दिया है, तो हो गये पति पत्नी , और बस इस कारण दोनो एक दूसरे की छाती पर सवार है, तलवारे खिंची है दोनों में, लड रहे है, झगड रहे है, फसाद कर रहें है, एक दूसरे पर अधिकार जमाने के षडयन्त्र कर रहें है। बस प्रेम नहीं कर रहें है, प्रेम दूर-दूर तक कहीं दिखाई नही पडता। कारण साफ है, एक दूसरे पर अधिकार जमाने की कोशिश में प्रेम की हत्या हो जाती है। एक दूसरे पर अधिकार जमाने की चेष्टा, प्रेम की हत्या है। एक दूसरे के प्रति समर्पण करना प्रेम है, जहां न कोई मांग है, न कोई लालच है, न कोई अधिकार जमाने की चेष्टा है, वहीं प्रेम का अकुरण होता है।पति-पत्नी तभी कहलाने का हक है, जब उनमें परस्पर प्रेम हो।’मुझे लगता है किसी भी रिश्ते में और खासकर पति और पत्नी के रिश्ते में सबसे पहली और जरूरी चीज है दोस्ती, क्योंकि दोस्ती के साथ रिश्ते की समझ बनती और बढ़ती है’।
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