त्रिवेणी कला संगम में तीन दिवसीय नाट्य समारोह का शुभारम्भ।

दिल्ली से सुधीर कुमार
‘ब्रह्मर्षि विश्वामित्र’ और ‘फटी हुई शादी की साड़ी’ नाटकों ने बांधा समांनई दिल्ली। मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में आयोजित तीन दिवसीय नाट्य सम्मेलन का भव्य शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर ‘ब्रह्मर्षि विश्वामित्र’ और ‘फटी हुई शादी की साड़ी’ जैसे प्रभावशाली नाटकों का सफल मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा नेता सुधीर अग्रवाल तथा गुरु सपन आचार्य द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्र कांत जी ने उपस्थित होकर कलाकारों की हौसला अफजाई की। कार्यक्रम में दिल्ली भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के सह-संयोजक ऋषि साहनी की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही अनिल वशिष्ठ का भी विशेष सहयोग और उपस्थिति उल्लेखनीय रही।नाटकों की प्रस्तुति ने सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को मंच पर जीवंत किया। ‘ब्रह्मर्षि विश्वामित्र’ में महर्षि विश्वामित्र की प्रभावशाली भूमिका कुलदीप वशिष्ठ ने निभाई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं युवा कलाकार खुशबू राजपूत ने मेनका, शिवा ने विश्वव्रत, ऋतिक शर्मा ने इन्द्र और अकबर ने गुरु वशिष्ठ के पात्र को जीवंत करते हुए अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का परिचय दिया। दूसरी ओर ‘फटी हुई शादी की साड़ी’ ने ग्रामीण जीवन की विडंबनाओं और स्त्री के आत्मसम्मान की मार्मिक कहानी के माध्यम से दर्शकों को भावुक कर दिया। नृत्य समूह द्वारा छउ लोकनृत्य की प्रस्तुति को उपस्थित कलाप्रेमियों से खूब सराहना मिली।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलाप्रेमियों की उपस्थिति रही, जिससे आयोजन की भव्यता और उत्साह और बढ़ गया। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति को सराहा और जोरदार तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। मंच संचालन की जिम्मेदारी रजनी सेन ने बखूबी निभाई, जबकि प्रकाश व्यवस्था सिद्धांत और संगीत संयोजन शोइब द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया, जिसने नाटकों को और जीवंत बना दिया। इस तीन दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में वरिष्ठ पत्रकार रितेश सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।आयोजन की सफलता में संस्था के अध्यक्ष एवं प्रखर रंगकर्मी कुलदीप वशिष्ठ की मार्गदर्शक भूमिका तथा उनके अनुभव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं संस्था के महासचिव एवं आयोजनकर्ता, वरिष्ठ राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता रिजवान रज़ा ने कहा कि इस प्रकार के नाट्य सम्मेलन समाज में जागरूकता फैलाने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर में जब डिजिटल माध्यमों का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे में रंगमंच जैसी जीवंत कला को संरक्षित और प्रोत्साहित करना और भी आवश्यक हो जाता है। इस सम्मेलन के जरिए युवाओं को रंगमंच से जोड़ने और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान किया गया, जो सांस्कृतिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।आयोजकों के अनुसार, इस तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर सोचने के लिए भी प्रेरित किया। कलाकारों की मेहनत, निर्देशन की परिपक्वता और मंच सज्जा की सजीवता ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया, जिसे दर्शक लंबे समय तक याद रखेंगे।
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