संसद में दो पक्ष जरूरी हैं देश चलाने के लिए सहमतिजरूरी है-RSS प्रमुख मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मणिपुर हिंसा और लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के रवैये पर कई बड़ी बातें कही हैं। नागपुर में संघ कार्यकर्ताओं के विकास वर्ग कार्यक्रम के समापन पर भागवत ने कहा, ‘एक साल से मणिपुर शांति की राह देख रहा है। इससे पहले 10 साल शांत रहा और अब अचानक जो कलह वहां पर उपजी या उपजाई गई, उसकी आग में मणिपुर अभी तक जल रहा है, त्राहि- त्राहि कर रहा है। इस पर कौन ध्यान देगा? प्राथमिकता देकर उसका विचार करना यह कर्तव्य है।’ गौरतलब है कि मणिपुर हिंसा में 200 से ज्यादा मौतें हुई हैं और 50 हजार लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।चुनाव प्रचार में मर्यादा टूटने का जिक्र करते हुए डॉ. भागवत ने कहा, चुनाव में जो कुछ हुआ उस पर विचार करना होगा। देश ने विकास किया है, लेकिन चुनौतियों को भी न भूलें। शेष | पेज 12 परजो मर्यादा का पालन करे, अहंकार न करे, वही सही सेवकभागवत ने कहा, जो अपने कर्तव्यों का पालनकरते हुए मर्यादा की सीमाओं का पालन करता है, जो अपने काम पर गर्व करता है, फिर भी अनासक्त रहता है, जो अहंकार से रहित होता है, ऐसा व्यक्ति ही वास्तव में सेवक कहलाने का हकदार है। काम करें, लेकिन मैंने किया यह अहंकार ना पाले तो हम इस देश की सच्ची सेवा कर रहे हैं ऐसा होगा।विपक्ष को विरोधी नहीं, प्रतिपक्ष कहना ही सहीसंसद में दो पक्ष जरूरी हैं देश चलाने के लिए सहमतिजरूरी है। संसद में सहमति से निर्णय लेने के लिए बहुमत का प्रयास किया जाता है, लेकिन हर स्थिति में दोनों पक्ष को मर्यादा का ध्यान रखना होता है। संसद में किसी प्रश्न के दोनों पहलू सामने आएं, इसलिए ऐसी व्यवस्था है। विपक्ष को विरोधी पक्ष की जगह प्रतिपक्ष कहना चाहिए।

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