दिनांक : 01 दिसम्बर, नई दिल्ली में “सदन चलाओ – जनता का पैसा और समय बचाओ”दमन-दीव सांसद उमेश भाई पटेल ने संसद के मकर द्वार पर बैनर प्रदर्शन कर सांसदों से की करबद्ध अपील ।

माननीय सांसद श्री उमेश भाई बाबू भाई पटेल (लोकसभा सदस्य, दमन एवं दीव) ने आज संसद के शीतकालीन सत्र-2025 के पहले दिन संसद भवन के मकर द्वार पर बैनर लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और सभी सांसदों से हाथ जोड़कर निवेदन किया कि इस बार सदन को सुचारु रूप से चलने दिया जाए तथा जनता के कीमती समय और धन की बर्बादी रोकी जाए।श्री पटेल ने कहा, “पिछले कई सत्र पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के अहंकार की टक्कर में जनता का समय बर्बाद हुआ, जनता का पैसा बर्बाद हुआ और सबसे बड़ा नुकसान जनता के विश्वास का हुआ। आज देश महंगाई से जुझ रहा है, बेरोजगारी चरम पर है, हंगर इंडेक्स हमारा हाल बेहाल है,किसान, युवा, महिलाएँ और समाज का हर वर्ग गंभीर संकट से जूझ रहे है। जनता ने हमें रास्ते की लड़ाई सदन लड़ने के लिए नहीं भेजा है, बल्कि काम करने और समस्याओं का समाधान करने के लिए चुना है।” सांसद महोदय ने सभी माननीय सदस्यों से निम्नलिखित अपील की :शीतकालीन सत्र में न्यूनतम 100 घंटे सदन की कार्यवाही चलाई जाए।शून्यकाल एवं प्रश्नकाल को पूरी तरह निर्विघ्न चलने दिया जाए।सभी महत्वपूर्ण विधेयकों पर बिना हंगामा किए विस्तृत एवं रचनात्मक चर्चा हो।जनता के सवालों का स्पष्ट और समयबद्ध जवाब दिया जाए।“No Work – No Pay” विधेयक पेश करने की घोषणाश्री उमेश भाई पटेल ने घोषणा की कि वे इसी शीतकालीन सत्र में निजी सदस्य विधेयक के रूप में“वेतन, भत्ते एवं पेंशन ऑफ मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट (संशोधन) विधेयक, 2025” दिनांक:- 10/11/2025 नोटिस नं0 – No. 1/19(1)/2025/L-II(लोकप्रिय नाम : No Work – No Pay Bill) पेश करेंगे।इस विधेयक के प्रमुख प्रावधान :जानबूझकर हंगामा कर सदन की कार्यवाही बाधित करने वाले सांसदों के वेतन एवं दैनिक भत्ते में आनुपातिक कटौती।बार-बार दोषी पाए जाने वाले सांसदों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का ठोस कानूनी प्रावधान।संसद की गरिमा पुनर्स्थापित करना एवं सांसदों में जवाबदेही सुनिश्चित करना।श्री पटेल ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी –“यह सदन जनता का है, जनता के पैसों से चलता है। अब जनता जागृत है, सब देख रही है और आने वाले समय में सभी से हिसाब लेगी।”अंत में सांसद महोदय ने देश के सभी मीडिया बंधुओं से अपील की कि इस ऐतिहासिक “No Work – No Pay Bill” का व्यापक प्रचार-प्रसार करें तथा जनता की आवाज को बुलंद करें, ताकि भारतीय संसद में अनुशासन, जवाबदेही और कार्य-संस्कृति का नया युग प्रारम्भ हो सके।
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