नारी।
पूनम त्रिपाठी गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
हर घर की मान है नारी,सारी दुनियाँ की शान है नारी। हर रिश्ते मे बंधती हों, ममता, प्यार से भरी हों। अपने घर की रानी हों, कभी न थकने वाली हो। नारी तुम नारायणी हो, हर पल मुस्कुराती हों। दर्द हों तो छुपा लेती हों, हर परिस्थिति मे हिम्मत हों। अबला नहीं सबला हों, हर मुश्किलों में मुस्कुराती।वक्त के थपेड़ों से घबड़ाती नहीं, अपने अकेलेपन से खुद लड़ती। छोटी-छोटी खुशियों से, झूम उठती हों। परिवार की खुशियो में ही, अपनी खुशियाँ ढूंढ़ती हों। समय के अनुसार, अपने को ढाल लेती हों कभी कोमल कभी चट्टान हों, कभी दुर्गा कभी काली हों। कभी त्याग कभी बलिदान, कभी अत्याचार पर तलवार हों। कभी गंगा की नीर हों तुम, कभी धधकती हुई ज्वाला हों। कभी तेज आँधियों में भी, नहीं बहती हों। तो कभी लहरों से भी पार, हो जाती हों तुम। सचमुच सारे जगत में, नारी महान हो तुम। पूनम त्रिपाठीगोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
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