साइकिल भी है खूब सवारी।
साइकिल भी है खूब सवारीथोड़े दाम काम दे भारीइसकी महिमा जग से न्यारीसभी जनों को दिल से प्यारीइसको खर्च न पानी चहिएपैर चलाओ चलते पहिए मगर संतुलन साधे रहिएदोनों हत्थे संभल के गहिएतो निश्चित है जीत तुम्हारी साइकिल भी है खूब सवारीथोड़े दाम काम दे भारीइसकी जग में महिमा न्यारीसभी जनों को दिल से प्यारी साथी श्रमिक किसानों की हैफौजी वीर जवानों की हैदानों और नादानों की हैमेज़बान ,मेहमानों की हैइस पर मोहित सब नर नारीथोड़े दाम काम दे भारीजिन पर कोई चले न गाड़ीउन रास्तों पर चले अगाड़ीजोर लगाओ चढ़ो पहाड़ीकभी न देखे जंगल झाड़ीसबकी दूर करे लाचारी साइकिल भी है खूब सवारीबच्चों का है खेल साइकिलकभी न मांगे तेल साइकिलचलती रेलम पेल साइकिलरखती जग से मेल साइकिलइसका मालिक रहे सुखारी साइकिल भी है खूब सवारी थोड़े दाम काम दे भारी- श्री उदय प्रताप सिंह जी।
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