जेएनयू में ‘जेएनयू ओलंपिक 2.0’ का ऐतिहासिक आगाज़; अभाविप ने ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान के साथ की शुरूआत।

जेएनयू में ‘जेएनयू ओलंपिक 2.0’ का ऐतिहासिक आगाज़; अभाविप ने ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान के साथ की शुरूआत।
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के क्रीड़ांगन में आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जेएनयू इकाई द्वारा तीन दिवसीय खेल महोत्सव ‘जेएनयू ओलंपिक 2.0’ का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर अभाविप ने अपने विशेष अभियान ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ का भी आगाज़ किया, जिसका उद्देश्य छात्रों को डिजिटल उपकरणों और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से बाहर निकालकर खेल के मैदान की वास्तविक ऊर्जा से जोड़ना है। उद्घाटन समारोह की शुरुआत आज तड़के एक विशाल ‘मैराथन’ के साथ हुई, जिसमें विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने दौड़ लगाकर इस संदेश को पुख्ता किया कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सक्रिय जीवनशैली अनिवार्य है। मैराथन के पश्चात मुख्य मशाल प्रज्वलन के साथ इस तीन दिवसीय महाकुंभ का विधिवत उद्घाटन हुआ।आज के पहले दिन एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं का बोलबाला रहा, जिसमें 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ के साथ-साथ ‘लॉन्ग जंप’ (लंबी कूद) में खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस वर्ष के ओलंपिक की सबसे बड़ी विशेषता ‘पैरा-गेम्स’ का समावेश रहा, जहाँ पैरा-एथलीटों के साहस ने संपूर्ण परिसर को प्रेरणा से भर दिया। अभाविप का ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जो अत्यधिक स्क्रीन उपयोग के कारण शारीरिक निष्क्रियता का शिकार हो रहे हैं। खेल के मैदान पर छात्रों की यह भारी उपस्थिति सिद्ध करती है कि जेएनयू का युवा अब तकनीक और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने के लिए जागरूक हो चुका है। इसके साथ ही बैडमिंटन और कबड्डी जैसी अन्य खेल विधाओं के प्रारंभिक मुकाबले भी जोश-खरोश के साथ शुरू हुए।जहाँ निकम्मा छात्र संघ केवल नकारात्मक विमर्श छात्रों का समय नष्ट करता है, वहीं अभाविप ने जेएनयू ओलंपिक के माध्यम से राष्ट्र के युवाओं को रचनात्मकता और अनुशासन का मार्ग दिखाया है। मैराथन से लेकर पैरा-गेम्स तक, आज के आयोजनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जेएनयू का विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक गरिमा के साथ-साथ खेल कौशल में भी अग्रणी है। प्रशासन और वामपंथी संगठनों द्वारा उत्पन्न की गई वैचारिक बाधाओं के बावजूद, अभाविप ने समावेशी खेल संस्कृति को बढ़ावा देते हुए यह सुनिश्चित किया है कि हर वर्ग का छात्र इस महाकुंभ का हिस्सा बने। यह तीन दिवसीय खेल महोत्सव 23 जनवरी तक निरंतर जारी रहेगा और 25 को पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन होगा।अभाविप जेएनयू इकाई अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि, “जेएनयू ओलंपिक 2.0 के साथ हमारा ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान छात्रों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।”अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण कु० पीयूष ने कहा कि, “21 से 23 जनवरी तक चलने वाला यह खेल महाकुंभ समावेशी भारत की तस्वीर पेश कर रहा है। पैरा-गेम्स का आयोजन और डिजिटल डिटॉक्स का हमारा आह्वान छात्रों को मानसिक रूप से भी सशक्त बनाएगा।”

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