भ्रष्टाचार :- ” राष्ट्र के विकास में बाधक” ।

Views: 506
1 0

Read Time:8 Minute, 49 Second

भ्रष्टाचार :- ” राष्ट्र के विकास में बाधक” भ्रष्टाचार दो शब्दों से बना है भ्रष्ट-आचार । भ्रष्ट का मतलब होता है बुरा और आचार का मतलब होता है आचरण । मतलब कि बुरा आचरण । दुनिया में भ्रष्टाचार बड़ी समस्याओं में से एक है । भ्रष्टाचार की वजह से किसी भी देश का विकास रुक जाता है। दुनियाँ के किसी भी देश में आप चले जाएं ईमानदारी से होने वाले कार्य बहुत ही कम दिखाई देंगे। बहुत ही कम लोग होंगे जो सच का साथ देते हैं और सच के लिए लड़ते हैं। हमारे देश में लोगों की मानसिकता का स्तर इतना गिर रहा है कि परिस्थिति वश होने वाली समस्याओं का जन्म लेना लाजिमी है, उसमें भी कई काम ऐसे होते हैं जो जनता से छुपकर किए जाते हैं, जनता को बेवकूफ बनाया जाता है और उन्हें गुमराह करके उनसे कुछ ऐसे काम भी करा लिए जाते हैं जो उनके जीवन के लिए खतरनाक साबित होता है। भोले भाले नागरिको को अपनी जालसाजी के भंवर में लोग इस तरह फंसाते हैं, जिसकी वजह से वो ना जी सकते हैं ना मर सकते हैं और उनके पास कोई रास्ता भी नहीं बचता है कि वह इस से बाहर निकल पाए।जनप्रतिनिधि सरकारी ठेके के नाम पर ठगता है, न्यायाधीश गलत न्याय के नाम पर लूटता है। सरकारी बाबू, इंजीनियर, डॉक्टर, पुलिस, क्लर्क चपरासी, दफ्तर में घूस लेते हैं। शिक्षाविद शिक्षा बेचने पर उतारू है, पुजारी मंदिर की आस्था और भगवान बेचने पर उतारू है। कोई दहेज से कमाता है तो कोई चापलूस या दलाली से। भ्रष्टाचार के इस दौर में धनवान इतराता है। बुद्धिजीवी खामोश है मीडिया बिका हुआ है और आम जनता त्रस्त है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह समाज में रहकर की अपनी सारी इच्छाओं को पूर्ण करता है और उन सभी वस्तुओं का इस्तेमाल करता है जो उनकी दिनचर्या में रोजाना काम आती है पर क्या यह सभी सभी वस्तुएं शुद्धता की खरी-खोटी पर आधारित है? क्या यह सभी वस्तुएं आप तक बड़ी आसानी से पहुंच पाई हैं? और उन में पाई जाने वाली गुणवत्ता आपके स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक और कितनी लाभदायक! क्या आप जानते हैं? इन सब वस्तुओं का इस्तेमाल करने पर यदि आपका स्वास्थ्य खराब होता है तो आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ता है, फिर डॉक्टर भी लंबी दवाइयों की लिस्ट बनाकर अपने ही अस्पताल के केमिस्ट में भेज देते हैं, ताकि उनका कमीशन भी उसमें मिले और जो दवाई दे रहा है उसे भी वह कमीशन प्राप्त हो। इससे जनता को मजबूर होकर महंगी दवाइयां लेनी पड़ती है, ना चाह कर भी उन्हें अपनी गृहस्थी का कुछ पैसा बचा कर परिजन के जीवन को बचाने के लिए बहुत मुश्किल से यह दवाइयां खरीदते हैं। मूल रूप से अंकित दवाइयों के दाम से ऊपर लोगों को यह दवाइयां लेनी ही पड़ती है, इन सब के पीछे कोई कार्यवाही नहीं होती है, क्योंकि यह सब काम एक तरह से दाल भात की तरह हो गया है जिस पर लोग आवाज उठाना नहीं जानते हैं! कई बार जब कोई केस बिगड़ जाता है अस्पताल मैं उस इंसान की मृत्यु के बाद भी लोगों को यह दिलासा दिलाया जाता है कि वेंटिलेटर पर है और दवाइयों का अरेंजमेंट करें फिर मजबूर होकर वह दवाइयां लेने जाते हैं, जबकि वह इंसान कब का मर चुका होता है! लेकिन कई डॉक्टर इस तरह पैसे वसूलने के बाद मृत इंसान को मृत घोषित करते हैं। यह भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, गोरखधंधा कब तक चलेगा? इस पर कोई आवाज उठाना क्यों नहीं जानता? कई बार अपराधी भी अपराध करके रिहा हो जाते हैं, जेल की दीवारों से निकलकर बाहर घूमते है, आसानी से जेल से ये रिहा होते कैसे है? इसके पीछे भी पुलिस प्रशासन के कुछ मिले हुए लालची व्यक्तियों का हाथ होता है जो रिश्वत लेकर अपराधी को रफा-दफा कर देते हैं और खतरनाक मुजरिमों को चंद पैसों की लालच के लिए उन्हें रिहा कर के खुश होते हैं, इस पर भी उस क्षेत्र के कुछ बाहुबलियों का हाथ होता है, जिनके दबाब में पुलिस प्रशासन भी रहती है। पर जब देश के रक्षक ही गलत करने लगे तो जनता इंसाफ मांगने किसके पास जाएगी? खुलेआम रोजाना कत्ल होते हैं, कई केस पुलिस थाने में दबे पड़े रहते हैं जो भी होता है इन सब पीछे रिश्वतखोर है। सभी पुलिस वाले ऐसे नहीं होते हैं मगर जो लोग ऐसे होते हैं गलत काम करते हैं उन पर एक्शन क्यों नहीं लिया जाता है? वह गलत पर गलत करते जाते है और अपराधियों को खुलेआम घूमने का टिकट प्राप्त हो जाता है। हिंसा, बलात्कार, भ्रष्टाचार सभी जगह इतना व्याप्त हो गया है, यदि इन सब के पीछे कोई है तो समाज के विभिन्न भ्रष्टाचारी ! ये लोग रिश्वत लेकर कुछ भी काम करने को तैयार हो जाते हैं। जनता की रक्षा करने वाले भक्षक जिन के चेहरे पर शराफत का मुखौटा लगा रहता है, आखिर कैसे मिलेगा इंसाफ? भ्रष्टाचार से ही देश हो या उसकी अर्थव्यवस्था सभी कलंकित हो रही है। सभी लोग अपनी मर्यादा को भूलकर गलत कृत्य करते हैं। ऑफिस से लेकर समाज के हर वर्ग में भ्रष्टाचार व्याप्त है। इसकी रोकथाम होनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि इसके खिलाफ कुछ लोगों ने आवाज नहीं उठाया, पर उनकी आवाज भी बंद कर दी जाती है रिश्वत देकर! आखिर कब तक चलेगा ये सब? इन सब की रोकथाम होनी चाहिए। सरकार को इस पर सख्त नियम कानून बना देना चाहिए, ताकि नेता और भ्रष्ट लोग गरीबों के साथ अन्याय कर ना सके। ये भ्रष्ट लोग रिश्वत लेकर ही किसी की जमीन पर कब्जा करते हैं और रिश्वत देकर गरीबों का खून भी चूस लेते हैं। नेता कुर्सी के लालच में सत्ताधारी बन कर दबंगई करते हैं, तो आम जनता सुखी कैसे रहेगी? यदि सरकार ही जागृत नहीं होगी, तो लोग इस तरह के गलत काम को अंजाम देते रहेंगे और देश को खोखला करते रहेंगे। भ्रष्टाचार का शिकंजा जड़ से कस चुका है हर कोई वर्जित काम को मनवाना चाहता है। यदि कानून सख्त हो जाए तो भ्रष्टाचारियो को कड़ा से कड़ा दंड दिया जाए, तो इस पर कुछ हद तक लगाम कसी जा सकती है। जनता को भी आवाज उठाना चाहिए और आगे बढ़ कर विरोध करना चाहिए तभी एक न्यायिक राज्य का निर्माण हो सकता है और ऐसे लोगों को दंडित करके अन्याय को रोका जा सकता है। पूजा गुप्तामिर्जापुर (उत्तर प्रदेश)

प्लीज लाइक सेयर एण्ड कॅमेन्ट करे।

Happy
Happy
100 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

You may also like