नारी जो लिपटी रही सारी मे झांसी की तरह कमर कस हो गई तैयार, बंद चारदीवारी और जिम्मेदारी से परे दुश्मन को देगी ललकार।
रानी रागिनी सिन्हा
नालंदा बिहार
आदि शक्ति स्वरुपा”नारी जो लिपटी रहे सारी मे, बंद चारदीवारी और जिम्मेदारी मे! औरो के तरह हमने भी सपने बुने है, लड़को के तरह लड़कियों के भी आसमां से ऊंचे उडाने है! हजार बंदिशे और लाख पबन्दियाँ हैं, रंगीन मेरे सपनो पंख मेरे कतरे हैं! हमसे ही है ये जग सारा, ममत्व का प्यार लुटाकर हर लेती दु:ख सारा! नारी तु ही तो नारायणी है, तु ही श्रृष्टि की अद्भुत रचना है! तु ही तो परिवार की गहना है, अपने भाई की प्यारी बहना है! नारी तु ही मानवता का आधार है, हा तु ही तो आदिशक्ति स्वरूपा हो! नारी जो लिपटी रही सारी मे झांसी की तरह कमर कस हो गई तैयार, बंद चारदीवारी और जिम्मेदारी से परे दुश्मन को देगी ललकार! रानी रागिनी सिन्हा नालंदा बिहार ।
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