वापी, 5 नवंबर, 2025 –वापी चाणोद स्थित गुरुद्वारा में गुरु नानक जयंती के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन।

वापी चाणोद स्थित गुरुद्वारा में गुरु नानक जयंती के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन।इस अवसर पर रक्तदाताओं ने भारी संख्या में बढ-चढकर हिस्सा लिए।वही इस रक्तदान शिविर में 139 यूनिट एकत्रित किए गए। जहा इस रक्तदान शिविर में काफी संख्या में महिलाए भी उपस्थित रही। वापी के गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार में सिख धर्म के संस्थापक और सार्वभौमिक भाईचारे के संदेशवाहक गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व (जन्मदिन) खुशी-खुशी मनाया गया। सभी ने इस पवित्र मौके पर प्यार, सम्मान और भक्ति के साथ हिस्सा लिया।उत्सव 3 नवंबर को अखंड पाठ साहिब (गुरु ग्रंथ साहिब का लगातार पाठ) के साथ शुरू हुआ। कार्यक्रम में अमृतसर से भाई महादीप सिंह जी द्वारा दिल को छू लेने वाला कीर्तन और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं पर ज्ञानवर्धक संदेश शामिल थे। कार्यक्रम का समापन लंगर सेवा (सामुदायिक भोजन) के साथ हुआ, जहाँ सभी लोग एक साथ बैठकर बराबरी से भोजन करते हैं, जो एकता और सेवा के गुरु के संदेश को दर्शाता है।गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँगुरु नानक देव जी ने 500 से भी ज़्यादा साल पहले शांति, प्रेम और समानता का संदेश दिया था। उनकी मुख्य शिक्षाओं में शामिल हैं:- नाम जपना – ध्यान और प्रार्थना के माध्यम से एक ईश्वर को याद करना- किरत करनी – कड़ी मेहनत और सच्चाई से ईमानदारी की ज़िंदगी जीना- वंड छकना – दूसरों के साथ बांटना और जाति या धर्म की परवाह किए बिना ज़रूरतमंदों की मदद करनागुरु नानक देव जी ने सिखाया कि भगवान के सामने सभी इंसान बराबर हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्यार, सच्चाई और विनम्र जीवन से सच्ची खुशी और शांति मिल सकती है। गुरु ने सभी लोगों को एक साथ लाने के लिए लंगर की परंपरा शुरू की, जिससे जाति और धर्म की बाधाएँ टूट गईं।गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने वापी और आस-पास के इलाकों के सभी निवासियों को इस पवित्र उत्सव में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रार्थना की कि गुरु नानक देव जी की दिव्य शिक्षाएँ सभी को शांति, एकता और सद्भाव की ओर ले जाती रहें। गुरुद्वारे ने सभी का खुले दिल और खुले दरवाज़ों से स्वागत किया।
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