जो मानस जप ठीक से करते हैं, उससे मानस ध्यान भी ठीक-ठीक होता है।
जो मानस जप ठीक से करते हैं, उससे मानस ध्यान भी ठीक-ठीक होता है। मानस ध्यान ऐसा होना चाहिए कि हू-ब-हू देख लिया जाय। परम श्रद्धेय बाबा देवी साहब ने एक दिन मुझसे पूछने की कृपा की, ‘क्या तुम मानस ध्यान में रूप हू-ब-हू निकाल लेते हो?’ मैंने कहा-‘जी नहीं, धुंधला दिखाई देता है।’ इस बात पर बाबा साहब ने कहा-‘मैंने मानस ध्यान किया और हू-ब-हू निकाल लिया है।’ तो इस प्रकार दोनों सीढ़ियों पर मजबूत होने पर विशेष युक्ति-द्वारा बिना दृश्य आधार के दृष्टि स्थिर हो जाती है, तब विन्दु का उदय होता है।
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