वापी तेरापंथ महिला मंडल ने अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल निर्देशानुसार रूपांतरण थ्रू जैनिज्म, शिल्पशाला एक्सप्रेस शांति की ओर बढ़ते हुए ” संयम – एक युद्ध स्वयं के विरुद्ध कार्यशाला का आयोजन 29 जून को तेरापंथ भवन में किया गया।
वापी तेरापंथ महिला मंडल ने अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल निर्देशानुसार रूपांतरण थ्रू जैनिज्म, शिल्पशाला एक्सप्रेस शांति की ओर बढ़ते हुए ” संयम – एक युद्ध स्वयं के विरुद्ध कार्यशाला का आयोजन 29 जून को तेरापंथ भवन में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नमस्कार महामंत्र द्वारा की गई। निक्की मेहता ने मंगलाचरण की बहुत ही सुंदर प्रस्तुति दी। महिला मंडल अध्यक्ष करुणा वागरेचा ने सभी का स्वागत किया। मुख्य वक्ता एकताजी कच्छारा ने अणुव्रत गीत से अपना वक्तव्य प्रारंब किया। एकता जी ने बताया की ” संयम ” क्यों करना चाहिए। ” संयम ” हमारे लिए क्यों जरूरी है और उदाहरण के माध्यम से बताया की अपने जीवन का कल्याण संयम के द्वारा कैसे कर सकते है। संयम हमारे जीवन में अमूल्य है संयम के बिना जीवन में बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। सांसारिक कार्य करते समय हर क्षण संयम के भाव आने चाहिए ताकि हम पाप कर्म से बच सके एक ग्रहस्थ व्यक्ति आवश्यक हिंसा से नही बच सकता। किंतु अनावश्यक हिंसा से बचे मन को संयमित कर लिया तो वचन और काया का संयम सहज हो जाता है। हम छोटे छोटे त्याग कर कर्मो की निर्जरा कर सकते है। त्याग के बिना निर्जरा नही हो सकती। तत्पश्चात मुख्यवक्ता का सम्मान किया गया। नारिलोक प्रस्नोत्री जून महीने में भाग लेने वाले प्रतियोगी का लक्की ड्रा द्वारा दो विजेता निर्मलाजी सांखला एवं प्रीतिजी सांखला रहे । कार्यशाला का कुशल संचालन एवं आभार ज्ञापन हेमा जी कच्छारा द्वारा किया गया । मंत्री सुनीता गुलगुलिया एवं महिला मंडल की सराहनीय उपस्थिति रही।
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