एक सूदखोरी के मामले में वापी में पति और पत्नी को राहत दंपति के खिलाफ शिकायत अदालत में आरोप साबित नहीं हुई ।

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एक सूदखोरी के मामले में वापी में पति और पत्नी को राहत दंपति के खिलाफ शिकायत अदालत में आरोप साबित नहीं हुई । मामले का विवरण यह है कि वापी के छीरी की निवासी रीनाबेन हलपति ने पिछले साल जनवरी में डूंगरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने छेरवाड़ा रोड के रहवासी अशोककुमार बिश्नोई और उनकी पत्नी पूजा बिश्नोई से कुल 1.30 लाख 20 प्रतिशत ब्याज पर लिए थे क्योंकि उसे पैसे की जरूरत थी। अशोककुमार बिश्नोई और उनकी पत्नी पूजा बिश्नोई पर 1.60 लाख रुपये के भुगतान के बावजूद ब्याज के लिए दंपति को कथित रूप से परेशान करने के लिए गुजरात मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था । मामले की सुनवाई वापी के मुख्य न्यायाधीश ने की लोक अभियोजक सरकारी वकील और बचाव पक्ष के वकील श्री शशांककुमार मिश्राने के लिए तर्क दिया । अदालत ने आरोपी को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 248(1), गुजरात मनी लांड्रिंग अधिनियम की 40, 42 के तहत बरी कर दिया। इस मामले में शिकायतकर्ता आरोपी के खिलाफ उधार देने या ब्याज पर पैसा वसूलने के संबंध में कोई आधारभूत सबूत पेश नहीं कर सका । अभियोजन के लिए लोक अभियोजक और मामले में आरोपी के वकील श्री शशांक ए.मिश्रा ने तर्क प्रस्तुत किए और अपने धार धार दलीली से आरोपी को अदालत से शिक्षा-योग्य अपराधों से बरी करने का आदेश दिलवाया ।बता दे इस साल के जनवरी से वलसाड जिला डी.एस.पी द्वारा व्याजखोरो के खिलाफ स्पेशल ड्राइव चलाया गया हैं, और इसी वक्त अदालत के ऐसे फैसले ने ये भी साबित किया के और कितने लोगो को फसाया होगा, जरूरतमंद लोगो को पैसा देने के बाद कई बेफिजूल केस दर्ज हुए होंगे।

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