भाई-बहन के बीच प्रेम त्याग व विश्वास का प्रतीक है रक्षाबंधन -स्वामी शांतानंद।

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भाई-बहन के बीच प्रेम त्याग व विश्वास का प्रतीक है रक्षाबंधन -स्वामी शांतानंद रक्षाबंधन पर्व भाई बहनों के बीच प्रेम त्याग व विश्वास का महापर्व है। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांध कर जीवन की सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं और भाई भी अपनी बहन को अभय आशीर्वाद देकर सुख शांति और समृद्धि का शीलत आशीष देते हैं। उक्त बातें महर्षि संतसेवी ध्यानयोग आश्रम धनावां के संचालक स्वामी शांतानंद जी महाराज ने सोशल मीडिया के माध्यम से वापी गुजरात में आयोजित सत्संग कार्यक्रम रक्षाबंधन के सुअवसर कही ।आपने प्रवचन में स्वामी शांतानंद जी महाराज ने कहा कि रक्षा बंधन का पर्व भाई बहन के बीच प्रेम त्याग व विश्वास का प्रतीक है।इनके पौराणिक मान्यता के अनुसार जब देवता और दैत्य के बीच लगातार बारह वर्षों तक युद्ध होता रहा और देवता की हार हुई तो देव गुरु वृहस्पति के बताये युक्ति से श्रावण मास के पूर्णिया के दिन ही देवराज इंद्र की पत्नी शची अपने पति की दाहिनी कलाई पर कच्चा धागा राखी बांध कर सुरक्षा कवच प्रदान की थी।फल स्वरूप देवराज इन्द्र की विजय हुई थी।एक अन्य मान्यता के अनुसार दैत्य राज बली स्वर्ग पर विजय प्राप्त करने हेतु यज्ञ कर रहे थे और देवता की माता अदिती भगवान बावन को पुत्र रूप में प्राप्त कर भगवान को बलि के यज्ञ भेजीं। भगवान वामन ने तीन पग भूमि दान में मांगा और बलि ने वचन दान दिया। परंतु भगवान ने दो पग में ही सारी पृथ्वी और स्वर्ग माप लिया तीसरा पग बलि ने अपने शीष पर रख लिया भगवान ने उसे पाताल भेज दिया। बलि ने भगवान से अपने यहां रहने का वचन मांग लिया।तब से भगवान बलि के यहां निवास करने लगे। इधर माता लक्ष्मी अपने पति भगवान को मुक्त कराने के लिए बलि के द्वार पर आकर बलि की कलाई पर राखी बांध कर उसे अपना भाई बना ली।और भगवान को मुक्त कराया।तब से भाई बहन का पावन पर्व मनाया जाता है।आज भी रक्षाबंधन का पावन पर्व प्रासंगिक है।

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