दादरा नगर हवेली में लगातार बढ़ रही है आत्महत्या की दर।
देव आनंद महानामा
दादरा नगर हवेली में लगातार बढ़ रही है आत्महत्या की दर
नरौली में राकेश सिंह सोलंकी की चॉल में युवक ने लगाई फांसी
सिलवासा: इन दिनो दादरा नगर हवेली में आत्महत्या की बढ़ती दर प्रशासन के लिए सिरदर्द का कारण बनती जा रही है. बीते कई वर्षों से नरौली आत्महत्या का हब बनता जा रहा है.
एक ओर नरौली के ब्रिज से लोग आत्महत्या के लिए नदी में छलांग लगा रहे है तो दूसरी ओर कोई न कोई नवयुवक नरौली के किसी न किसी कोने में फांसी लगाकर अपना जीवन समाप्त कर रहा है.
लगातार आत्महत्या की दर से प्रशासन हैरान परेशान है.
बीते दिन एक 22 वर्षीय युवक गौरानंद ने नरौली में राकेश सिंह सोलंकी की चॉल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मृतक युवक नीलकमल कंपनी में काम करता था और पिछले एक साल से राकेश सिंह सोलंकी की चॉल में रहता था.
युवक ने आत्महत्या क्यों की ये तो जांच का विषय है. आत्महत्या की कई वजह हो सकती है.. नीलकमल कंपनी युवक को समय पर पगार देती थी या नहीं, ये भी देखना पड़ेगा. युवक ने आर्थिक परेशानी से आत्महत्या की या ब्याज खोरों से परेशान होकर सुसाइड की या कोई प्रेम प्रसंग के चलते या घरेलू विवाद से घबराकर सुसाइड की ये जांच के बाद पता चलेगा. कही कही मकान मालिक के हैरान परेशान करने की वजह से भी लोग सुसाइड कर लेते है मगर इस मामले में ऐसा नहीं हुआ होगा क्योंकि राकेश सिंह सोलंकी एक सज्जन और भले व्यक्ति है.
आत्महत्या की दर घटाने के लिए मेरा यह आलेख एक छोटा सा प्रयास है. अगर आपके पास 5 मिनट की फुर्सत हो तो इसे जरूर पढ़िए.
क्यों करते हैं लोग आत्महत्या ?
आत्महत्या करने वाले की पहचान ….
आत्महत्या करने वालों को कैसे रोकें ?
दोस्तों, लेख का विषय बहुत ही संवेदनशील है, आत्महत्या कोई भी कर सकता है, आत्महत्या किसी भी फील्ड का व्यक्ति कर सकता है,यहां तक कि किसी भी परिस्थिति का व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है और आत्महत्या किसी भी उम्र का व्यक्ति कर सकता है.
रोगी हो, स्वस्थ हो, बच्चा हो, वृद्ध हो, नर हो, नारी हो, गरीब हो, अमीर हो, अधिकारी हो, नेता हो, अभिनेता हो, लेखक हो …कोई भी हो किसी भी व्यक्ति के दिमाग मे आत्महत्या के विचार आ सकते है.
आप आये दिन अखवारों और न्यूज चैनलों में पढ़ते सुनते रहते है, फलाने ने आत्महत्या कर ली, ढिकाने ने आत्महत्या कर ली..ये सुनकर….. ये पढ़कर बहुत खराब लगता है.इन आत्महत्या करने वालो में हमारे परिचित भी होते है.
कई बार तो यकीन ही नही होता कि इतने जिंदादिल आदमी ने आत्महत्या कैसे कर ली..फिर हम नाहक कयास लगाते रहते है, जिसका कोई फायदा नही होता .
देश में हर साल लाखों लोग आत्महत्या करते है, जिनमे किसानों, विद्यार्थियों और बेरोजगार लोगो की संख्या सबसे ज्यादा होती है. इस मामले में सरकार कितनी दोषी है, उस पर हम अलग से चर्चा करेंगे, पर हर आत्महत्या में अप्रत्यक्ष रूप से समाज दोषी होता है ये तो पक्की बात है ,इस पर भी हम अगले अंक में चर्चा करेंगे.फिलहाल मुद्दे पर आते है .
आत्महत्या कई तरीके से की जाती है, उस पर हम चर्चा नहीं करेंगे. आत्महत्या करने की कम से कम 200 वजह हो सकती है,कुछ लोग अकारण भी आत्महत्या करते है, हालांकि इसकी कोई न कोई वजह तो होती ही होगी पर हमें उस के आत्महत्या करने के कारण का पता जिंदगी भर नही चलता इसलिए हम उस पर भी चर्चा नहीं करेंगे .
आत्महत्या करने की ये वजह हो सकती है
1) अचानक नौकरी का चला जाना
2) धंधा ठप्प हो जाना
3) प्रेम प्रसंग / अनैतिक संबंध का खुलना
4) शादी न होना,शादी टूट जाना
5) किसी प्रिय जन का मर जाना
6) बहुत बेइज्जती होना
7) दिल टूट जाना
8) घातक बीमारी से परेशान होना
9) आर्थिक तंगी से जूझना
10) कर्जा हो जाना
11) बहुत ज्यादा नुकसान हो जाना
12) नशे का आदी होना
13) राज खुल जाना
14) कुछ लोगों द्वारा अत्यधिक परेशान करना
इन 14 मुख्य कारणों में सभी कारण आ गए, इसलिए बाकी कारणों पर हम चर्चा फिर कभी करेंगे.
अब आते है आत्महत्या करने वाले के लक्षण पर …
जिन्हें पहचान कर हम उन्हें बचा सकते है.
मनो वैज्ञानिकों का कहना है कि आत्महत्या करने का विचार दिमाग में तभी आता है, जब दिमाग में सेरोटोनिन का लेवल गिर जाता है. आत्महत्या करने वाले को पैनिक अटैक भी आते हैं .उसके लक्षण निम्नलिखित है .
.1) खूब पसीना आना
2)दिल में घबराहट होना
3) सांस लेने में तकलीफ होना
4)चक्कर आना
5)ठंड लगना
6) स्तब्ध हो जाना
7) मरने का डर होना
जब कोई आपका परिचित आपसे इस तरह की बात करता है तो उसे इग्नोर न करें उसे फौरन डाक्टर को दिखाए .
कई बार हम इसे इग्नोर कर देते है जिसकी वजह से हम अपने परिजन को खो देते है .इग्नोर मत कीजिये अगर इस तरह के लक्षण आपको किसी में दिखे तो भले ही वो आपसे चर्चा न करें फिर भी आप उस पर नजर रखिये ,कई लोग अंतर्मुखी होते है इसलिए वे बताते नही है और चुपचाप दुनिया छोड़ देते है ..
पैनिक अटैक के बाद हम मुख्य लक्षण पर आते है .
1) अगर किसी को भूख नही लग रही है और उसका वजन घट रहा है तो फौरन सचेत हो जाये.
2) अगर किसी को नींद बिल्कुल न आ रही हो या बहुत ज्यादा नींद आ रही हो तो सावधान हो जाये.
3)अगर किसी का किसी काम में मन न लग रहा हो और वो चिड़चिड़ा हो गया हो तो सचेत हो जाये.
4)अगर कोई आपको गंभीर परेशानी में दिखे तो सचेत हो जाये
5) अगर कोई आप को अपराध बोध से ग्रसित दिखे या हीनता से भरी बात करे तो सचेत हो जाये.
6) अगर कोई बार बार मरने या आत्महत्या की बातें करे तो सचेत हो जाये
7) कोई अकारण हिंसा की बात करने लगे तो सचेत हो जाये.
8) किसी के मूड में तेजी से बदलाव आने लगे तो सचेत हो जाये
9) अगर कोई परिचित लोगो ,परिजनों औऱ दोस्तो से दूरी बनाकर अलग थलग एकांत में रहने लगे तो सावधान हो जाये.
10) अगर कोई खुद को दुसरो पर बोझ और बेकार समझने लगे तो सावधान हो जाये .
11) अगर कोई आत्महत्या करने के साधन के बारे में पूछे तो सावधान हो जाये
मसलन रस्सी किधर मिलती है, जहर किधर मिलता है, ये किधर मिलता है, वो किधर मिलता है
वगैरह वगैरह
ये लक्षण आपको खुद में भी दिखे तो फौरन डाक्टर से मिले.
अब थोड़ा उपचार भी कर ले ..
इसके लिए…
1) पौष्टिक आहार खाये.
2)व्यायाम करें.
3)नेगेटिव लोगों से दूर रहे.
4)आराम करें, पूरी नींद लें.
5)दोस्तों और परिजनों के बीच रहें.
6)पुरानी कड़वी बातों को भूल जाये.
7) पोजिटिव लोगों के संपर्क में रहे
8)कोई शौक पालें, मसलन बागवानी, गायन, वादन, लेखन, पेंटिंग, खेल कूद
इन सभी गतिविधियों से आपके दिमाग में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ जाएगी ,जिससे आप अवसाद से जल्द ही उबर जाएंगे.
क्योकि
आत्महत्या की मुख्य वजह तनाव बढ़ना ही होता है.
आप आत्महत्या करने वाले को कैसे बचाये ?
कोई भी व्यक्ति मरना नही करना चाहता, वो सिर्फ अपनी बात आप तक पहुंचाना चाहता है,वो कई बार अपनी बात, अपनी परेशानी कह नही पाता ,इसलिए उसकी बॉडी लैंग्वेज उसकी तरफ से संकेत देती है, आप समझ नही पाते या जानबूझकर ध्यान नहीं देते उसे वो व्यक्ति अपनी उपेक्षा समझ लेता है और वो आत्मघाती कदम उठाकर आत्महत्या कर लेता है .
दरअसल,आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अचानक कदम नही उठाता, ये उधेड़बुन उसमें कई दिन से चल रही होती है फिर किसी क्रूशियल मोड़ पर वो आत्महत्या कर लेता है .
कई बार आत्महत्या करनेवाला फेसबुक पर लाइव आकर भी आत्महत्या कर लेता है, ऐसे लोगो से आप लगातार बात करें उसका ध्यान भटकाये तो उसकी जान बच सकती है .
दिल्ली और मुंबई पुलिस ने इसी ट्रिक से कई लोगो की जान बचाई है.
कोई टंकी में चढ़ गया हो, ऊंची बिल्डिंग पर चढ़ गया हो, टावर पर चढ़ गया हो, ट्रेन के ऊपर चढ़ गया हो, पुल पर चढ़ गया हो तो उससे लगातार बात कीजिये, पॉजिटिव बात कीजिये, उसका ध्यान भटकाइये, उसके नजदीक अचानक मत जाइए .
उसके गुस्से को शांत होने दीजिए.
अब आते है दूसरी कंडीशन पर ,जो आपके सामने नही घट रही है, पर घट सकती है.
A )आत्महत्या करने वाला कई बार सोशल मीडिया पर अपना उद्गार व्यक्त करता है इसलिए जब सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट आ जाये तो उससे इस संदर्भ में बात जरूर करें.
B) आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अंतिम दिन अक्सर अपने परिचित से माफी मांगता है.अकारण कोई आपसे माफी मांगे तो सचेत हो जाये, उससे बाते करें.
C) आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अंतिम दिन अपने प्रिय व्यक्ति से बात जरूर करता है.
इसलिए दोस्तों, जब भी आपका परिचित सोशल मीडिया पर इस तरह की बात करे तो सचेत हो जाये .
गाहे बगाहे अगर देर रात को किसी परिचित का फोन आ जाये तो उससे बात जरूर करें हो सकता है वो उसका अंतिम दिन हो और हो सकता है आपसे बात करके वो अपना इरादा बदल लें..
5 मिनट का खेल है दोस्तो, अगर आप उस क्रूशियल पीरियड में उसकी बात सुन लेंगे तो हो सकता है आप उसकी जान बचा लें .
– देव आनंद महानामा
रचना के सर्वाधिकार सुरक्षित
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