वापी कोर्ट द्वारा ₹.4.70 लाख के चेक बाउंस केस में आरोपी निर्दोष और नहीं भरने को आया एक भी रुपया।

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वापी कोर्ट द्वारा ₹.4.70 लाख के चेक बाउंस केस में आरोपी निर्दोष और नहीं भरने को आया एक भी रुपया। वापी के सेकेंड एडिशनल सिविल जज और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास साहब मृणाली जिगिशकुमार किकानी (मे. जे. किकानी) के कोर्ट मे चला हुआ केस। जिसमे फरियादी:– शशिबाला कुलदीप सिंह द्वारा आरोपी:–पूजा अशोककुमार बिश्नोई के ऊपर नेगोसिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 की कलम-138 के मुजब ₹.4.70 लाख का चेक बाउंस होते ही फरियादी द्वारा नामदार अदालत में केस दायर किया गया था। केस को आधार मिले उसके लिए कोर्ट में फरियादी द्वारा एक करार को भी रखा था जो के फरियादी और आरोपी के बीच में हुआ था ₹.4.70 लाख को लेके हुआ था। जिसके अनुसंधान में आरोपी के विद्वान वकीलश्री शशांककुमार अनिलकुमार मिश्रा द्वारा फरियादी को नामदार अदालत में सवाल पूछे। परंतु फरियादी खुद के केस को बलपूर्वक रखने में असमर्थ रहा और असफल रहा। यह करार कोई साधारण करार नहीं नोटरी रूबरू सही सिक्का कराया हुआ करार था पर फरियादी अपने केस को साबित ही नही कर सका और आरोपी को सच में दिए गए थे ₹.4.70 लाख उसका कोई आधार या फिर कोई प्रूफ फरियादी द्वारा पेश नहीं किया जा सका। यह केस में आरोपी के तरफ से रहे विद्वान वकीलश्री द्वारा महत्व के प्रूफ और साक्षी नामदार अदालत में पेश किए गए। जिसका लाभ आरोपी को मिला। अंत में आरोपी पक्ष के विद्वान वकीलश्री शशांककुमार अनिलकुमार मिश्रा के दलील को ग्राह्य रख आरोपी के हक में तारीख:-08/11/2023 को नामदार अदालत द्वारा फैसला सुनाया गया। जिसमे आरोपी की जीत हुई और आरोपी निर्दोष तेहराया गया और नहीं भरना को आया एक भी पैसा। यह केस से ये स्पष्ट है के चेक बाउंस के केसों में मात्र चेक बाउंस होने से आरोपी को पैसा देना ही पड़े वैसा नही हैं। फरियादी को खुद का केस प्रूव करना पड़ता हैं और वाकई में फरियादी का कायदेसर का पैसा आरोपी के पास से निकल रहा हैं उससे भी प्रूव करना महत्व हैं। जो के इस केस में फरियादी करने में असफल रहा। हाली में ये भी देखा गया हैं के बहोत सारे व्याजखौर द्वारा जिनको उन्होंने पैसा दिया हैं। उनके पास से हस्ताक्षर कराए हुए चेक लेकर उसको बाउंस कराया जा रहा हैं और उनसे ज्यादा पैसा ले सके उसके लिए कोर्ट में मुकदमा दायर किया जा रहा हैं। और अदालत में चेक बाउंस के केसों का भरमार हो रहा हैं। नामदार अदालत वापी के सेकेंड एडिशनल सिविल जज और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास साहब मृणाली जिगिशकुमार किकानी (मे. जे. किकानी) के इस फैसले को ऐसे गलत तरीके से दायर केस या फिर बदनीयती से दाखिल किए गए केसों में जल्द निकाल लायेगा। और चेक बाउंस के केस को गलत तरीके से डाले गए हैं सिर्फ और सिर्फ आरोपी से पैसा निकल सके उन सब पर एक रोक लायेगा और ये फैसला अति महत्व का फैसला माना जा रहा हैं जो के भविष्य में भी उपयोग होगा।

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